KAILASH MANSROWAR YATRA

विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल ना होने से क्या पड़ेगा देवभूमि उत्तराखंड में प्रभाव जानिए…

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कोरोनावायरस कोविड-19 कि वैश्विक महामारी ने उत्तराखंड को सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक नुकसान भी पहुंचाया है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जून के दूसरे सप्ताह से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा (KAILASH MANSAROVAR YATRA) जिसको विदेश मंत्रालय द्वारा रद्द कर दिया गया है लेकिन इस यात्रा का रद्द होने का सबसे ज्यादा प्रभाव देवभूमि उत्तराखंड पर पड़ेगा

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इस बार बम बम भोले की गूंज न सुनाई देगी और न देशभर से आने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रियों का दल दिखाई देगा, क्योंकि कोरोनावायरस कोविड-19 की वजह से इस वर्ष इस यात्रा को रोक दिया गया है लिहाजा आस्था पर भी कोविड-19 का यह असर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है खासकर उत्तराखंड में जो न सिर्फ देवभूमि है बल्कि विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत यहीं से होती है यात्रा के पहले पांच पड़ाव उत्तराखंड में पढ़ते हैं, कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड में सबसे पहले काठगोदाम फिर भीमताल फिर अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ गूंजी नाभि डांग होते हुए चीन तिब्बत बॉर्डर तक पहुंचती है। इस यात्रा के ना होने से इस बार उत्तराखंड में इस यात्रा का संचालन करने वाली संस्था केएमवीएन को अकेले साढ़े 4 करोड़ से भी अधिक का नुकसान होगा.

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वहीं भगवान भोलेनाथ के निवास स्थल कैलाश पर्वत के दर्शन की विश्व की सबसे लंबी धार्मिक पैदल यात्रा के रुक जाने से शिवभक्त भी निराश हैं इसके अलावा इस यात्रा के इस वर्ष ना होने से उत्तराखंड में आर्थिक नुकसान भी होगा क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्री सीमावर्ती क्षेत्रों में न सिर्फ होमस्टे में रहते हैं बल्कि उनको पहाड़ी उत्पादों से बने सुंदर व्यंजन का भोजन भी कराया जाता है जिससे उस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है लेकिन इस बार यह नहीं हो पाएगा केएमवीएन की उपाध्यक्ष रेनू अधिकारी का भी कहना है कि कोरोनावायरस के कहर ने वास्तविक रुप से नुकसान पहुंचाना शुरू किया है।

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हर साल 12 जून को हर-हर महादेव के जयकारे के साथ शुरू होने वाली इस यात्रा मैं कोरोनावायरस ने इस बार ऐसा विष घोल दिया है जिससे कि यह पौराणिक यात्रा इस बार बंद कर दी गई है ऐसे में अब शिव भक्तों को भगवान भोलेनाथ का सहारा है कि वह इस वायरस को खत्म कर सृष्टि में फिर से आस्था और धर्म की जीत का मार्ग सुनिश्चित करेंगे।

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