अल्मोड़ा: प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन, शोक की लहर

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अल्मोड़ा: प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन, शोक की लहर

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक दीवान कनवाल का निधन हो गया है।बुधवार की अलसुबह खत्याड़ी स्थित अपने आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका… यात्रा की गाइड और यात्रा की जानकारी

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक दीवान कनवाल का निधन हो गया है।बुधवार की अलसुबह खत्याड़ी स्थित अपने आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार बेतालेश्वर घाट में होगा।

वह इन दिनों शल्य चिकित्सा के बाद अपने आवास में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।

कनवाल का गाया”द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनी में” गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। इधर बीजेपी नेता ललित लटवाल ने अपने सोसल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है कि”अभी-अभी बहुत दुखद समाचार प्राप्त हुआ…हम सबके प्रिय हमारा गौरव ,लोक कलाकार ,बहुत ही सभ्य सरल इंसान दीवान दा कनवाल का ईस तरह अचानक चले जाना बहुत हृदय विदारक है.. यह हमारे पूरे समाज की एक अपनी क्षति है… भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें… ॐ शांति शांति शांति।”

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अल्मोड़ा के पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने भी लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि दी है।
दीवान कनवाल का निधन हो गया है। वो 65 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। हल्द्वानी स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के बाद वो अपने खत्याड़ी स्थित आवास में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे,आज सुबह 4 बजे के आसपास उनका निधन हो गया।यात्रा की गाइड और यात्रा की जानकारी

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उनके दो बेटे और दो बेटिया है। उनके बड़े पुत्र अल्मोड़ा में ही प्राइवेट काम करते है जबकि छोटे बेटे मुंबई में जॉब करते है। उनकी पत्नी का बहुत समय पहले निधन हो चुका था। घर में उनकी वृद्ध मां,उनके बड़े पुत्र और रहता है। उनके निधन पर अल्मोड़ा नगर के नागरिकों और लोक कलाकारों ने शोक जताया है।

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लोकगायक जिला सहकारी बैंक से रिटायर होने के बाद लोक गीतों के सृजन में पूरी तरह से तल्लीन हो गए थे। बीते साल शेर दा अनपढ़ की यादो को ताजा करता एक गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। यह गीत उन्होने लोकगायक और पत्रकार अरूण ढौढियाल के साथ गाया था। जीवन की क्षणभंगुरता के बारे में बताता हुआ ”दो दिनों का ड्यार शेरुवा यो दूनी में,ना त्यार ना म्यार शेरूवा यो दुनि में” एक भावपूर्ण लोक गीत है जो किजीवन की क्षणभंगुरता के बारे में बताता है।

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