रानीखेत, जब भी डायनासोर काल का जिक्र होता है तो रौंगटे खड़े हो जाते हैं. मगर उस काल की यादें एक पेड़ के रूप में उत्तराखंड के जंगलों में भी मौजूद है. यह है जिंकोबाइलोवा, जिसे धरती पर मौजूद जिंदा जीवाश्म कहा जाता है। कोसी कटारमल समेत उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में जिंकोबाइलोवा के पेड़ हैं. जो उत्सुकता जगाते हैं। यह जिंकोगेशिया परिवार की पृथ्वी पर जीवित एकमात्र वृक्ष प्रजाति है.
डायनासोर काल से पाए जा रहे जिंकोबाइलोवा के संरक्षण को लेकर हुए प्रयासों के बाद उत्तराखंड में भी इसने जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं। उत्तराखंड वानिकी शोध शाखा रानीखेत के वैज्ञानिकों ने जिंकोबाइलोवा की प्रजाति के क्लोन उगाने में कामयाबी हासिल की थी. देहरादून चिडिय़ाघर समेत कुछेक अन्य स्थानों पर भी वन महकमे ने इस दुर्लभ प्रजाति के पौधे लगाए हैं, जो अपनी जड़ें जमा चुके हैं. अब जिंकोबाइलोवा के पौधों का रोपण को विस्तार देने की योजना है.



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