भीमताल- कहते हैं मेहनत का फल मीठा होता है और यह कहावत अगर सटीक बैठती है तो पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल पर जिन्होंने पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक धरोहर को बचाने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी तक हस्तांतरित करने का काम किया है यही वजह है उन्हें अब उनकी मेहनत का फल मिलने लगा है यह तस्वीर है बताने को काफी है कि हमारे प्राकृतिक जलस्रोत नॉले धारे गधेरे धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं और सूखते जा रहे हैं हमारे बुजुर्गों की विरासत में दी जल संरक्षण की तकनीक जिन्हें हम चाल, खाल, खंतियां कहते हैं।

और इन सब को संरक्षित करने का काम किया उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल विधानसभा के ओखल कांडा ब्लॉक के युवा चंदन नयाल ने, जिन्होंने न सिर्फ पर्यावरण के लिए प्रेरणादाई काम किया बल्कि पहाड़ के वर्षा जल संरक्षण के लिए नईगांव के चामा चोपड़ा में 20 से 25 बड़े चाल खाल, 100 से अधिक खँतियाँ तैयार की और बरसात का इंतजार किया।
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मानसून की पहली बरसात ने युवा पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल और उनके साथियों की मेहनत पर चार चांद लगा दिए जिस उद्देश्य से उन उन्होंने इन चाल खाल और खतियां का निर्माण किया था वह आज वर्षा जल संग्रहण से भरी हुई है।
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समाज के प्रति कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए चंदन नयाल कहते हैं “हमारे द्वारा बनाए गए चाल खाल खंतियां बारिश के दौरान भर चुकी है इससे वर्षा का जल संरक्षित होकर जमीन में संचित होगा जिससे हमारे जल स्त्रोत नौले, धारे ,गधेरे, पुनर्जीवित होंगे साथ ही हमारा इनको बनाने का उद्देश्य यह भी है क्योंकि यह पूरा चीड का जंगल है जिसमें प्रतिवर्ष आग लगने के कारण मिट्टी की उर्वरा क्षमता खत्म हो चुकी है साथ ही चीन के पैरोल से मिट्टी बहुत सख्त हो चुकी है जिसमें चौड़ी पत्ती के पौधों का पौधारोपण असंभव सा हो रहा था इस क्षेत्र में भूमि में नमी न होने के कारण पौधे मर सकते थे को देखते हुए हमने यह कार्य प्रारंभ किया जिससे अब इस क्षेत्र में नमी बनी रहेगी और साथ ही जानवरों को पानी भी यहां पर प्राप्त हो सकता है”
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2 thoughts on “शाबाश भुला- वास्तव में पहाड़ की तस्वीर बदलने को आतुर है युवा, चाल खाल, खंतियां को पुनर्जीवित करता ये पर्यवरण प्रेमी”
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