वित्त वर्ष 2026 का बजट करदाताओं और उद्योग जगत के लिए लाभकारी
चार्टर्ड अकाउंटेंट रोहित कांडपाल एवं टैक्स एडवोकेट दीपक सिंह बिष्ट का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2026 के लिए प्रस्तुत किया गया बजट कई महत्वपूर्ण मामलों में करदाताओं और उद्योग जगत के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस बजट में कर प्रणाली को सरल बनाने और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा, जिससे कर व्यवस्था में स्पष्टता आएगी। हालांकि आयकर स्लैब्स में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा को भी स्पष्ट किया गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तथा अन्य करदाताओं के लिए 31 अगस्त निर्धारित की गई है। इसके अलावा मोटर एक्सीडेंट क्लेम को आयकर में छूट के दायरे में लाने से पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी।
रिटर्न को रिवाइज करने की समय सीमा मार्च तक बढ़ाई जाएगी, हालांकि इसके लिए लेट फीस का प्रावधान रखा गया है। साथ ही बजट में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 करदाताओं, मध्यम वर्ग और उद्योग जगत के लिए संतुलित और लाभकारी है।
बजट 2026: आयकर के नए युग की शुरुआत, नियमों में सरलीकरण और करदाताओं को बड़ी राहत
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया वर्ष 2026-27 का बजट प्रत्यक्ष करों के मामले में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा ‘आयकर अधिनियम 2025’ को लागू करना है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल और विवाद-मुक्त बनाना है।
आईटीआर फाइलिंग की नई समय-सीमा (Staggered Timeline):
करदाताओं की सुविधा के लिए अब रिटर्न भरने की समय-सीमा को चरणों में बांटा गया है:
• 31 जुलाई: व्यक्तिगत करदाताओं (ITR 1 और ITR 2) के लिए अंतिम तिथि।
• 31 अगस्त: गैर-ऑडिट वाले व्यावसायिक मामलों और ट्रस्टों के लिए नई समय-सीमा।
• इसके अलावा, संशोधित या विलंबित रिटर्न भरने की अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है।
विवादों को कम करने के लिए ‘अपडेटेड रिटर्न’ की सुविधा:
मुकदमेबाजी को कम करने के लिए वित्त मंत्री ने प्रस्ताव दिया है कि करदाता अब पुनर्निर्धारण (Reassessment) की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी अपना रिटर्न अपडेट कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित वर्ष के टैक्स पर 10% अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इसके बाद असेसिंग ऑफिसर केवल इसी अपडेटेड रिटर्न को आधार बनाएगा।
F&O ट्रेडिंग और शेयर बायबैक पर नए नियम: बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने और प्रमोटरों द्वारा टैक्स चोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं:
• STT में वृद्धि: फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
• बायबैक पर टैक्स: अब सभी शेयरधारकों के लिए बायबैक ‘कैपिटल गेन्स’ माना जाएगा। हालांकि, प्रमोटरों के लिए प्रभावी टैक्स की दर 22% (कॉर्पोरेट) और 30% (गैर-कॉर्पोरेट) होगी।
प्रॉपर्टी खरीददारों और आम आदमी के लिए राहत:
• बिना TAN के TDS: अब अनिवासियों (Non-residents) से संपत्ति खरीदने पर खरीदार को अलग से ‘टैन’ (TAN) लेने की जरूरत नहीं होगी; वे अपने पैन (PAN) आधारित चालान से ही टीडीएस जमा कर सकेंगे।
• कम TCS: विदेश यात्रा और पढ़ाई/इलाज के लिए पैसे भेजने पर टीसीएस की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है।
• MACT क्लेम: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाले ब्याज को आयकर से मुक्त कर दिया गया है।
अपराधों का गैर-अपराधीकरण:
बजट में कई तकनीकी चूकों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है। अब ऑडिट में देरी या बही-खाते न दिखाने जैसे मामलों में जेल के बजाय केवल मामूली शुल्क देना होगा। अधिकतम कारावास की अवधि को भी 7 साल से घटाकर 2 साल कर दिया गया है।

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