उत्तराखंड: बिंदुखत्ता में किसान महासभा का बड़ा ऐलान, चुनाव से पहले राजस्व गांव का मुद्दा फिर गरमाया

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लालकुआं। बिंदुखत्ता में अखिल भारतीय किसान महासभा का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में किसानों और स्थानीय लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान किसान परिषद और किसान कमेटी का गठन भी किया गया। नई कार्यकारिणी में विमला पाल रौथाण को अध्यक्ष और किशन बघरी को सचिव चुना गया।

सम्मेलन में किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी ने किसानों की समस्याओं और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने, फसलों का उचित मूल्य तय करने और किसानों की कर्ज संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

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उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन आगे भी आंदोलन करेगा। सम्मेलन में भूमि अधिकार, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज माफी और किसानों की जमीन से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

किसान महासभा के जिला अध्यक्ष भुवन जोशी ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के लोगों को एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांग रखनी होगी।

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उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के लोगों को लंबे समय से राजस्व गांव का इंतजार है। संगठन की ओर से इस मांग को लेकर आगे भी आंदोलन और कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई।

भाकपा माले के नैनीताल जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने क्षेत्रीय विधायक और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने बिंदुखत्ता सहित विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में सड़क, तटबंध और राजस्व गांव से जुड़े मुद्दों को उठाया।

उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता से लेकर सुल्ताननगरी और बागजाला तक कई क्षेत्र राजस्व गांव बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही गौला नदी से होने वाले भू-कटाव और सड़कों की स्थिति को लेकर भी उन्होंने सरकार से काम कराने की मांग की।

सम्मेलन के दौरान 39 सदस्यीय किसान परिषद का चुनाव किया गया। परिषद ने 17 सदस्यीय कार्यकारिणी का चयन किया। इसमें विमला पाल रौथाण को अध्यक्ष, मुन्नी मेहता को उपाध्यक्ष, किशन बघरी को सचिव, शशि गड़िया को उप सचिव और निर्मला शाही को कोषाध्यक्ष चुना गया।

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इसके अलावा नैन सिंह कोरंगा को उप कोषाध्यक्ष, कमल जोशी को संगठन मंत्री और त्रिलोक शाह को प्रचार मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। पार्वती मेहरा को भी कार्यकारिणी में जिम्मेदारी मिली।

सम्मेलन में किसान महासभा की ओर से 11 सूत्रीय प्रस्ताव भी पारित किए गए। इनमें बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने, जमीन का मालिकाना हक देने और विधानसभा चुनाव से पहले इस दिशा में प्रक्रिया पूरी करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा क्षेत्र की खराब सड़कों की मरम्मत, पक्के रास्तों का निर्माण, वन और सरकारी भूमि पर लंबे समय से रह रहे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के न हटाने, किसानों को भूमि अधिकार देने और स्थानीय लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई।

गौला नदी से होने वाले भू-कटाव को रोकने के लिए मजबूत तटबंध बनाने और फुलबट्टा से हल्द्वानी तीनपानी तक बाईपास सड़क बनाने की मांग भी प्रस्ताव में शामिल है।

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सम्मेलन में बिंदुखत्ता में बिजली के पोल जरूरत वाले स्थानों पर लगाने, घोड़ानाला क्षेत्र में मगरमच्छों की समस्या से निजात दिलाने और प्रदूषित नाले के पानी की उचित व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई।

स्थानीय उद्योगों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए काम करने तथा किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों के हितों से जुड़ी नीतियों को लागू करने की मांग भी प्रस्तावों में रखी गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष विमला पाल रौथाण ने सम्मेलन के समापन पर बिंदुखत्ता के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने सरकार से राजस्व गांव और भूमि अधिकार के मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की मांग की।

सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता आनंद सिंह सिजवाली ने की, जबकि संचालन किशन बघरी ने किया। कार्यक्रम में किसान महासभा, भाकपा माले और अन्य संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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