राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत में जेंडर विमर्श पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
शीतलाखेत (अल्मोड़ा)। राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत के अंग्रेजी विभाग द्वारा 12 सितंबर 2026 को “वॉइसेज, विसेजेस, एंड वॉइड्स: रीथिंकिंग जेंडर अक्रॉस लिटरेचर, कल्चर, एंड द डिजिटल स्फीयर” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने ऑनलाइन जुड़कर साहित्य, संस्कृति और डिजिटल माध्यमों में लैंगिक विमर्श के विविध आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. सैयद अली हामिद, नालंदा विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. श्रवण कुमार शर्मा तथा दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. गौरहरि बेहेरा शामिल रहे। उन्होंने समकालीन संदर्भों में लैंगिक अस्मिता और साहित्य के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए।
वहीं, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व प्रो. रानू उनियाल ने काव्य प्रस्तुति (Poetry Recital) के माध्यम से जेंडर संवेदनाओं को रेखांकित किया।
प्लेनरी सत्र में किरोड़ीमल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के डॉ. देब दुलाल हलधर, राजकीय महाविद्यालय रानीखेत की डॉ. बरखा रौतेला तथा नजरथ मार्गोशिस कॉलेज (तमिलनाडु) के डॉ. एस. गैरेट राजा इम्मानुएल ने व्याख्यान प्रस्तुत किए। इसके साथ ही आमंत्रित वक्ताओं (Resource Persons) के रूप में डॉ. अंकित राज ओझा (हरियाणा), डॉ. कृतिका क्षेत्री (श्रीनगर गढ़वाल), डॉ. मीनाक्षी (खाड़ी, टिहरी गढ़वाल), डॉ. उजमा निखत (बिहार) और डॉ. हरिओम रावत (थलीसैंण) ने तकनीकी सत्रों में अपने शोध पत्र एवं विचार साझा किए।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एल. पी. वर्मा ने सभी प्रतिभागियों एवं वक्ताओं का स्वागत करते हुए ऐसे आयोजनों को शोध व संवाद के लिए आवश्यक बताया। संयोजक एवं विभागाध्यक्ष (अंग्रेजी) डॉ. वसुंधरा लस्पाल ने संगोष्ठी के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच उन अनसुनी आवाजों और सामाजिक रिक्तियों (Voids) को दर्ज करने का एक प्रयास है जो अक्सर अकादमिक विमर्श से छूट जाती हैं।
कार्यक्रम के आयोजन में आईक्यूएसी (IQAC) समन्वयक डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी, समन्वयक डॉ. दीपिका आर्या, डॉ छत्र सिंह कठायत, डॉ. लक्ष्मी मनराल, डॉ. सीमा प्रिया, डॉ. राजेंद्र चंद्र पांडेय सहित महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों व कर्मियों का सक्रिय सहयोग रहा। संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, निदेशक प्रो. वी.एन. खली, संयुक्त निदेशक डॉ. आनंद सिंह उनियाल तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट रहे। अंत में संयोजक द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी संपन्न हुई।

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