Haldwani- बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से एक परिवार में टूटा दुःखो का पहाड़…पहले बेटी और फिर बेटे को ले गया काल….

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कुमाऊँ का सबसे बड़ा शहर हल्द्वानी जिसमें बड़े-बड़े अस्पतालों का जमवाड़ा सा है लेकिन कोरोनावायरस corona virus के खौफ के वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लड़खड़ा गई है कि मरीजों को उपचार तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. ऐसा ही एक दुखद मामला सामने आया है जहां 6 घंटे के भीतर एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की इलाज के अभाव में मौत हो गई।

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मामला हल्द्वानी के गांधीनगर क्षेत्र का है जहां पप्पू नाम के युवक की हाइडल गेट के पास पंचर की दुकान है और उसी से अपने परिवार का गुजर-बसर करता है बताया जा रहा है कि नवमी के दिन पप्पू की बेटी निधि की अचानक तबीयत खराब हुई बेटी के सिर में सिर दर्द की शिकायत के बाद उसे बेस अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने निधि को हाथ लगाने से भी मना कर दिया, परिवार द्वारा मन्नतें मांगने के बाद डॉक्टरों ने निधि को एसटीएच भेज दिया, जहां शनिवार रात 11:00 बजे निधि की मौत हो गई।

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अभी घर में निधि की मौत का मातम चल ही रहा था कि पप्पू के 6 वर्षीय बेटे विवेक की अचानक तबीयत खराब होने लगी, परिजन विवेक को लेकर रामपुर रोड एक निजी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे निमोनिया का मर्ज बताकर भर्ती तो कर लिया, लेकिन रात 8:00 बजे उसकी ज्यादा तबीयत खराब हो जाने पर उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. जिसके बाद परिजन विवेक को बीएसटीएच ले गए जहां इमरजेंसी सेवाएं बंद पाई गई परेशान पिता पप्पू ने पहले बेटी को खोकर अब बेटे को हर हाल में बचाने के भरसक प्रयास किए, एसटीएच के बाद वह अपने बेटे को एक निजी अस्पताल ले गया वहां फिर डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर दिया लेकिन रात 1:00 बजे उन्होंने भी जवाब दे दिया, यहां तक कि अस्पताल ने एंबुलेंस भी नहीं दी, पप्पू अपनी स्कूटी में किसी तरह बच्चे को अपने घर लाए और सुबह 5:00 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। 6 घंटे के भीतर एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की मौत के बाद परिवार के ऊपर मानो दुखों का पहाड़ टूट गया।

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सरकारी सिस्टम और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से कुमाऊ के सबसे बड़े शहर में हॉस्पिटल का हब होने के बावजूद भी अगर ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था है तो इस स्वास्थ्य व्यवस्था से भगवान ही बचाए ? जहां गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं है कोरोना के इस काल में आखिर हर कोई यही पूछ रहा है कि स्वास्थ्य व्यवस्था क्या अब राम भरोसे है? ऐसी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था में क्या कोरोनावायरस जैसी गंभीर बीमारी से लड़ा जाएगा ? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कोरोनावायरस के अलावा अन्य बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई इंतजाम नहीं किए???

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