उत्तराखंड: वन विभाग की अचानक छापेमारी से मचा हड़कंप, इन कारोबारियों पर कड़ी नजर!

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देहरादून। उत्तराखंड में वन संपदा से जुड़े कारोबार और उद्योगों पर वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की टीमें देहरादून, हरिद्वार समेत कई इलाकों में वन उपज का इस्तेमाल करने वाले संस्थानों की अचानक जांच कर रही हैं। इस अभियान में प्लाईवुड, लकड़ी, लीसा और वन उत्पादों के भंडारण व परिवहन से जुड़े संस्थानों को भी शामिल किया गया है।

वन विभाग का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी और अन्य वन उपज वैध स्रोत से खरीदी गई है या नहीं। इसके साथ ही संबंधित दस्तावेज, स्टॉक, खरीद-बिक्री और माल के परिवहन का रिकॉर्ड भी देखा जा रहा है।

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हरिद्वार और लालतप्पड़ में कार्रवाई

अभियान के दौरान हरिद्वार में एक संस्थान के वन आधारित उत्पाद को विभाग की टीम ने जब्त किया है। वहीं देहरादून वन प्रभाग के लालतप्पड़ क्षेत्र में भी एक संस्थान का निरीक्षण और छापेमारी की गई।

इस अभियान की खास बात यह है कि कई जगहों पर जांच के लिए स्थानीय वन प्रभाग के बजाय दूसरे डिवीजन की टीम भेजी जा रही है। विभाग का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष रहेगी और स्थानीय स्तर पर किसी तरह के दबाव या मिलीभगत की संभावना कम होगी।

किन संस्थानों पर नजर?

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वन विभाग की निगरानी में ऐसे कारोबार आते हैं, जहां वन क्षेत्र से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल होता है। इनमें प्लाईवुड और प्लाई आधारित उद्योग, आरा मिल, लकड़ी प्रसंस्करण इकाइयां, लीसा से जुड़े कारोबार और वन उपज के भंडारण व परिवहन से जुड़े संस्थान शामिल हैं।

जांच के दौरान अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि संस्थानों में रखा कच्चा माल कहां से आया है। उसकी खरीद के बिल और दूसरे जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं, इसका मिलान स्टॉक से किया जा रहा है।

अवैध वन उपज पर रोक लगाने की कोशिश

वन विभाग का मानना है कि अवैध कटान से निकाली गई लकड़ी या अन्य वन उपज को बाद में कागजी कारोबार के जरिए बाजार में पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से विभाग कच्चे माल की खरीद से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहा है।

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अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अवैध वन उपज या नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

देहरादून के डीएफओ नीरज शर्मा के मुताबिक वन विभाग की ओर से इस तरह की जांच लगातार की जाती है। मौजूदा अभियान का उद्देश्य वन आधारित कारोबार में अवैध गतिविधियों को रोकना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना है।

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