उत्तराखंड: राजस्व ग्राम की अधिसूचना नहीं मिलने से नाराज बिंदुखत्ता के लोग, अब हल्द्वानी में महारैली और घेराव की तैयारी

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लालकुआं: बिंदुखत्ता को वन अधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद ठोस आश्वासन नहीं मिलने से नाराज आंदोलनकारियों ने अब हल्द्वानी में महारैली करने की तैयारी शुरू कर दी है। रविवार को तहसील परिसर में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के सातवें दिन बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों के संयोजक और सहसंयोजक धरने पर बैठे। उत्तराखंड क्रांति दल ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।

वन अधिकार संगठन की ओर से यह धरना 5 अक्टूबर से चल रहा है। इससे पहले 15 अगस्त को पदयात्रा और 27 सितंबर को महारैली निकाली गई थी। रविवार को धरना स्थल पर गीत-संगीत और संबोधन के जरिए राजस्व ग्राम की मांग उठाई गई।

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धरने में शामिल लोगों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में एक और महारैली आयोजित की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी का घेराव करने की भी योजना है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि दिसंबर में प्रस्तावित महारैली को व्यापक बनाने के लिए बिंदुखत्ता के हर घर तक संपर्क अभियान चलाया जाएगा। साथ ही वन भूमि पर बसे दूसरे गांवों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश होगी…ताकि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों की मांग को मजबूती से उठाया जा सके।

वन अधिकार संगठन के मुताबिक देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट और कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा ने धरना स्थल पर आंदोलनकारियों को बातचीत की जानकारी दी।

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संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि के अनारक्षण से जुड़ी पत्रावली केंद्र सरकार के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट भेजने की बात दोहराई। संगठन ने इस पर नाराजगी जताई।

आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि वन भूमि के अनारक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती है…तो इसके बदले जरूरी दोगुनी भूमि कहां से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि यदि मामला बापू ग्राम की तरह लंबित हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। संगठन का कहना है कि वन विभाग आज भी बिंदुखत्ता की पुरानी बसासत को अतिक्रमण की सूची में शामिल करता है।

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धरना स्थल पर उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और जनमैत्री संगठन के बच्ची सिंह बिष्ट पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया और बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग उठाई।

धरने में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, नारायण सिंह कोरंगा, सूबेदार खड़क सिंह पपोला, अधिवक्ता बलवंत बिष्ट समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी भाग लिया।

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