उत्तराखंड: बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, बारिश के बीच पदयात्रा में जुटे सैकड़ों ग्रामीण

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हल्द्वानी: बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर शुरू हुई पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। 15 अगस्त को शहीद स्मारक से शुरू हुई यह पदयात्रा विभिन्न गांवों से होते हुए रावत नगर पहुंची। बारिश के बावजूद पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए।

पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों को बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग के साथ-साथ वन अधिकार अधिनियम, 2006 की जानकारी भी दी जा रही है।

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अभियान की खास बात यह है कि स्थानीय कलाकार गीत, भजन, जनगीत और नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को वन अधिकार कानून की जानकारी दे रहे हैं। कलाकारों द्वारा कानून के कठिन प्रावधानों को आसान भाषा और स्थानीय अंदाज में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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इस दौरान बिंदुखत्ता के इतिहास और उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी भी ग्रामीणों के सामने रखी जा रही है।

कार्यक्रम में बताया जा रहा है कि बिंदुखत्ता की बसावट वर्ष 1932 से पहले की बताई जाती है और वर्ष 1952 में यहां प्राथमिक विद्यालय भी स्थापित हो चुका था। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इसके बाद वन विभाग बिना बंदोबस्ती के क्षेत्र में आया।

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संगठन की ओर से यह भी बताया जा रहा है कि वन पर तीन पीढ़ियों की निर्भरता से जुड़े प्रमाण सरकार के सामने रखे जा चुके हैं। ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम में दी गई तीन पीढ़ियों की शर्त का अर्थ भी समझाया जा रहा है।

पदयात्रा के तहत आज रात गौला नदी के किनारे स्थित तीन मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के साथ बिंदुखत्ता से जुड़े अभिलेखों और अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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संगठन के सचिव बलवंत बिष्ट ने कहा कि गीत, भजन, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के जरिए कानूनी विषयों को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। उनके अनुसार इस माध्यम से ग्रामीणों को विषय समझने में आसानी हो रही है और अभियान में लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है।

पदयात्रा के आयोजकों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर जनजागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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