रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर से सरकारी नौकरी को लेकर एक अलग तरह का मामला सामने आया है। वन निगम में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत के बाद उसकी दो पत्नियों ने मृतक आश्रित के तौर पर मिलने वाली नौकरी पर अपना-अपना दावा किया है। दोनों पक्षों के दावे के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल से आगे नहीं बढ़ पाई है।
दिसंबर 2024 में हुई थी कर्मचारी की मौत
मामला कालाढूंगी वन निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहे प्रेम राम से जुड़ा है। उनकी दिसंबर 2024 में मौत हो गई थी। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली मृतक आश्रित नौकरी के साथ-साथ ईपीएफ और दूसरी देय राशि को लेकर भी विवाद शुरू हो गया।
जानकारी के अनुसार कर्मचारी की दो पत्नियां थीं। एक पत्नी कालाढूंगी में कर्मचारी के साथ रहती थी…जबकि दूसरी पत्नी हल्द्वानी में अलग रहती थी।
दोनों पत्नियों ने नौकरी के लिए किया दावा
कर्मचारी की मौत के बाद कालाढूंगी में रहने वाली पत्नी ने मृतक आश्रित नियुक्ति के लिए वन निगम में आवेदन किया। विभाग ने आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान दूसरी पत्नी ने भी सामने आकर नौकरी पर अपना दावा पेश कर दिया।
दोनों महिलाओं के दावे के बाद विभाग के सामने यह तय करना मुश्किल हो गया कि मृतक आश्रित के रूप में नौकरी किसे दी जाए।
मामला अदालत तक पहुंचा
नौकरी को लेकर विवाद पहले परिवार न्यायालय तक पहुंचा। वहां मामला पूरी तरह हल नहीं हो सका। इसके बाद दोनों पक्ष जिला न्यायालय पहुंच गए। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दस्तावेज और दावे पेश किए गए हैं।
अदालती विवाद के चलते वन निगम ने अभी नियुक्ति को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
परिवार के सामने आर्थिक परेशानी
इस पूरे विवाद का असर कर्मचारी के परिवार पर भी पड़ रहा है। कालाढूंगी में रहने वाली पत्नी के सामने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने की चुनौती बताई जा रही है। महिला के चार बच्चे हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
महिला ने विभाग से मृतक आश्रित के तहत नौकरी देने की मांग की है। उसका कहना है कि नौकरी मिलने से वह बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें पूरी कर सकेगी।
वन निगम कोर्ट के फैसले का कर रहा इंतजार
वन निगम के अधिकारियों के अनुसार कर्मचारी की पहली पत्नी के साथ विवाद के बाद दोनों अलग-अलग रह रहे थे। कर्मचारी बाद में दूसरी शादी करके कालाढूंगी में रहने लगा था। पहली पत्नी की ओर से भरण-पोषण को लेकर भी न्यायालय में मामला चल रहा था।
अधिकारी के मुताबिक कर्मचारी की मौत के बाद दोनों महिलाओं ने खुद को उसकी पत्नी बताते हुए मृतक आश्रित नौकरी का दावा किया है। मामला कोर्ट में होने के कारण विभाग फिलहाल न्यायालय के आदेश का इंतजार कर रहा है। कोर्ट के आदेश और कानूनी राय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल नौकरी और कर्मचारी से जुड़ी अन्य देय राशि को लेकर विवाद अदालत में है। फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मृतक आश्रित के तौर पर नौकरी किसे मिलेगी।
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