उत्तराखंड: SIR को लेकर कांग्रेस पर बरसे प्रताप बिष्ट, बोले- आरोप लगाने के बजाय प्रमाण दें

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नैनीताल: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नैनीताल के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि मतदाता सूची को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय पार्टी को तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।

12 अक्टूबर को जारी बयान में प्रताप सिंह बिष्ट ने कहा कि SIR का उद्देश्य किसी पात्र नागरिक का मताधिकार छीनना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान की जाती है। साथ ही, जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची में छूट गए हैं उन्हें नाम जुड़वाने का अवसर भी मिलता है।

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भाजपा जिलाध्यक्ष ने उत्तराखंड की मतदाता सूची के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि SIR से पहले राज्य में करीब 79.60 लाख मतदाता दर्ज थे। उनके मुताबिक प्रारूप सूची तैयार करने के दौरान लगभग 8.27 लाख नाम ऐसे मतदाताओं की श्रेणी में चिह्नित हुए…जिनका सत्यापन अनुपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु या अन्य कारणों से नहीं हो सका था।

उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 7133,785 मतदाता दर्ज थे। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में 129872 नए नाम जोड़े गए…जबकि 104708 नाम हटाए गए।

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बिष्ट के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची में कुल 7158949 मतदाता दर्ज हुए। यह संख्या प्रारूप सूची के मुकाबले 25164 अधिक है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रक्रिया में नाम जोड़ने और हटाने दोनों तरह के काम हुए।

प्रताप सिंह बिष्ट ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले भी होता रहा है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि पार्टी को सूची में फर्जी या दोहरे नामों से जुड़ी गड़बड़ियों की जानकारी है….तो उसे निर्वाचन आयोग के सामने प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल मतदाताओं की संख्या में बदलाव के आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है। किसी नाम को लेकर आपत्ति होने पर संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा, आपत्ति और सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

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भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना उचित नहीं है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से छूटता है….तो उसकी शिकायत का निष्पक्ष समाधान होना चाहिए। इसके साथ ही मृत और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नामों की जांच भी जरूरी है।

उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार के लिए प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज कराना जरूरी है। भाजपा ने पारदर्शी चुनाव व्यवस्था और पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

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