देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाने पर सेतु आयोग ने जोर दिया है। अवस्थापना विकास सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने कहा कि गांवों में मजबूत बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य के सतत विकास के लिए जरूरी है। इससे पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में दिनेश अग्रवाल ने कहा कि सेतु आयोग नीतियां तैयार करते समय जमीनी जरूरतों और वास्तविक परिस्थितियों को प्राथमिकता दे रहा है। आयोग अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है।

आयोग की ओर से पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटैलिटी कौशल केंद्र में बेहतर प्लेसमेंट व्यवस्था और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर लक्षित काम किया जा रहा है। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर और टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
दिनेश अग्रवाल ने बताया कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से डिजिटल और फ्यूचर स्किल्स पर काम किया जा रहा है। नैसकॉम के सहयोग से राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों में रोजगार से जुड़े कौशल विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है।
इसके साथ ही किसानों को बड़े खरीदारों तक पहुंच दिलाने और विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ओवरसीज प्लेसमेंट सेल की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
पर्वतीय क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन और तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए नगरीय निकायों को अधिक अधिकार देने से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने और प्रदेश के लिए नए शहरी कानून का प्रारूप तैयार करने पर भी काम चल रहा है।
सेतु आयोग की ओर से मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए राज्य के विश्वविद्यालयों की भी मदद ली जा रही है।
इसके अलावा ‘विकसित उत्तराखंड-2047’ के लिए एक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसे राज्य सरकार द्वारा अपनाने की प्रक्रिया चल रही है।
आयोग राज्य में डेटा आधारित सुशासन को बढ़ावा देने के लिए डेटा गवर्नेंस नीति तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है, ताकि लोगों को बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
दिनेश अग्रवाल ने कहा कि पर्वतीय गांवों तक अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना विकास की प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उनका कहना है कि जब गांवों में पढ़ाई, इलाज और रोजगार के बेहतर विकल्प मिलेंगे तो युवाओं को अपने गांव में ही भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा और पलायन की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।


अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें
हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें



हल्द्वानी: कार पर नीली बत्ती, ‘भारत सरकार’ का बोर्ड और हाथ में एयरगन…पुलिस ने खोला पूरा फर्जीवाड़ा
नैनीताल: जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, आज होगी शोक सभा
उत्तराखंड: बिंदुखत्ता आंदोलन पर विधायक की टिप्पणी से भड़के ग्रामीण, 27 सितंबर की रैली का ऐलान
उत्तराखंड: हिंदी दिवस पर प्रदेशवासियों को CM धामी की शुभकामनाएं, कही ये बात
चारधाम यात्रा ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, गंगोत्री में पहली बार 7.84 लाख श्रद्धालु
उत्तराखंड: अयोध्या में दिखेगी देवभूमि की झलक, रुद्रपुर में युवाओं के लिए बनेगा बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
उत्तराखंड: ‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार’, छात्रों की बात सुनकर CM धामी ने दिया बड़ा संदेश
उत्तराखंड : अग्निवीर भर्ती का शेड्यूल जारी, जानिए किस जिले के युवाओं की कब होगी भर्ती
बच्चों का भविष्य संवारने दिल्ली गई कविता, संदिग्ध मौत की खबर से अल्मोड़ा में मचा कोहराम 
