ऊधम सिंह नगर: असम राइफल्स पूर्व सैनिकों ने जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया को सौंपा ज्ञापन, DGAR के ‘देशद्रोही’ आरोपों पर भारी आक्रोश
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर), 16 जनवरी 2026 — असम राइफल्स एक्स-सर्विसमेन वेलफेयर एसोसिएशन (अखिल भारतीय) – AREWA के सदस्यों ने आज जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध रैली निकाली। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया को विस्तृत ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट मांग की कि यह पूरा मुद्दा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक जरूर पहुंचाया जाए।
रैली में सबसे ज्यादा गुस्सा और आक्रोश उस बात पर दिखा जब पूर्व सैनिकों ने वर्तमान DGAR लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा द्वारा जारी की गई एडवाइजरी (11 सितंबर 2025 और 31 दिसंबर 2025) का जिक्र किया। इन एडवाइजरी में AREWA को “एंटी-नेशनल” और “सिस्टम-विरोधी” करार दिया गया था। पूर्व सैनिकों ने भावुक होकर कहा, “भाई, हम सोशल मीडिया पर रहते हैं, फेसबुक देखते हैं तो क्या हम देशद्रोही हो जाते हैं? हमने देश के लिए खून-पसीना बहाया, 190 साल पुरानी इस फोर्स के गौरव को संभाला है, लेकिन अब हमारी वैध मांगों को दबाने के लिए ऐसे झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए जा रहे हैं। यह सहन नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि DGAR इन एडवाइजरी के जरिए पूर्व सैनिकों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे सिर्फ समान काम के लिए समान वेतन और पेंशन की मांग कर रहे हैं।
पूर्व सैनिकों ने बार-बार दोहरे नियंत्रण की समस्या को रेखांकित किया। असम राइफल्स देश का एकमात्र ऐसा बल है जहां परिचालन और कार्य रक्षा मंत्रालय (MoD) तथा भारतीय सेना के अधीन हैं, यानी सेना जैसा जोखिम, ऑपरेशन, सीमा सुरक्षा और आतंरिक सुरक्षा का काम करते हैं। वहीं वेतन, पेंशन और प्रशासनिक सुविधाएं गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन हैं। उन्होंने कहा, “हम सेना जैसा काम और जोखिम उठाते हैं, लेकिन पेंशन और लाभ अन्य CAPFs जैसे BSF, CRPF, CISF, ITBP आदि के स्तर पर मिलते हैं। यह स्पष्ट अन्याय है और इसे ठीक किया जाना चाहिए।”
रैली में 1 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण आदेश (W.P.(C) 10493/2017) का कई बार जिक्र हुआ। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि AREWA की सेना के समकक्ष वेतन-पेंशन की मांग पर विचार कर तीन महीने के अंदर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। AREWA ने इसे सकारात्मक कदम माना, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
AREWA ने 1 जनवरी 2026 से भारत और नेपाल में DGAR का पूर्ण बहिष्कार घोषित कर दिया है। ज्ञापन में मांग की गई कि ये सभी गैर-कानूनी एडवाइजरी तुरंत वापस ली जाएं और पूर्व सैनिकों के खिलाफ लगाया जा रहा दबाव रोका जाए।
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया (IAS) ने ज्ञापन प्राप्त किया और पूर्व सैनिकों की भावनाओं को समझते हुए आश्वासन दिया कि मांगों और ज्ञापन को उच्चाधिकारियों तथा राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र तक पहुंचाया जाएगा, ताकि यह मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय तक जरूर पहुंच सके। उन्होंने पूर्व सैनिकों के अमूल्य योगदान का सम्मान भी किया।
रैली में हेमलता, बलवंत सिंह दोसाद, शेरी राम, दीवान सिंह, शंकर आर्या, उम्मेद सिंह, जी डी पांडे, दीवान बोरा, कुण्डल सिंह सहित कई पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
190 साल पुरानी असम राइफल्स (1835 से स्थापित) ने देशसेवा में 4 अशोक चक्र, 10 परम विशिष्ट सेवा पदक, 34 अति विशिष्ट सेवा पदक, 18 वीर चक्र सहित हजारों सम्मान प्राप्त किए हैं। पूर्व सैनिकों का कहना है कि इतने गौरवशाली इतिहास के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा।
AREWA ने स्पष्ट किया कि जब तक एडवाइजरी वापस नहीं ली जातीं और उनकी मांगों पर गंभीर विचार नहीं किया जाता, विरोध जारी रहेगा। देशभर में ऐसी रैलियां चल रही हैं और ऊधम सिंह नगर का यह ज्ञापन प्रधानमंत्री तक उनकी आवाज पहुंचाने का एक मजबूत कदम है।
स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है — क्या केंद्र सरकार तीन महीने की समयसीमा में कोई फैसला लेगी?

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