उत्तराखंड: सरकारी योजना से मिला 10 लाख का सहारा, पहाड़ में शुरू किया काम; अब हर महीने हो रही 60-70 हजार की कमाई

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

नैनीताल। उत्तराखंड में पर्यटन के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं से युवाओं को अपने क्षेत्र में ही व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल रहा है। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर क्षेत्र के नथुआखान में संचालित ‘कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप एंड रिजॉर्ट’ भी इसी तरह की पहल का उदाहरण है।

कैंप के संचालक मनोज बिष्ट ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर अपने पर्यटन कारोबार को आगे बढ़ाया। योजना के तहत उन्हें उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि का इस्तेमाल उन्होंने कैंपिंग और एडवेंचर से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करने में किया।

नथुआखान और मुक्तेश्वर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसी क्षेत्र में तैयार किया गया कुमाऊं रोडीज एडवेंचर कैंप पर्यटकों को ठहरने के साथ कई तरह की गतिविधियों का विकल्प देता है।

कैंप में पर्यटकों के लिए कमरे और टेंट की व्यवस्था है। इसके अलावा रॉक क्लाइम्बिंग, जिप लाइन, तीरंदाजी और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं। जंगल साइटसीइंग, स्टार गैजिंग और बोनफायर जैसी सुविधाएं भी कैंप का हिस्सा हैं।

कैंप आसपास के फलदार बागानों और पहाड़ी क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है। यहां आने वाले पर्यटकों को पहाड़ों के शांत माहौल के साथ हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता देखने का मौका मिलता है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में अर्द्धवार्षिक गृह परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग के निर्देश, 27 अक्टूबर से परीक्षाएं

मनोज बिष्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के जरिए मिली आर्थिक मदद ने उनके व्यवसाय को स्थापित करने और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में पूंजी की जरूरत सबसे बड़ी चुनौती थी….जिसे बैंक ऋण के जरिए पूरा करने में मदद मिली।

मनोज बिष्ट के अनुसार कैंप से होने वाली आमदनी में से सभी खर्च निकालने के बाद वर्तमान में उन्हें हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपये की आय हो रही है। पर्यटन कारोबार बढ़ने के साथ क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

मनोज बिष्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड सरकार का आभार जताया। उनका कहना है कि सरकारी योजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपने विचार को व्यवसाय में बदलने में मदद की।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के शिक्षकों को मिलेगी AI की ट्रेनिंग, SCERT और कोटक एजुकेशन फाउंडेशन के बीच हुआ MoU

उन्होंने अन्य युवाओं से भी अपील की कि वे अपने आसपास मौजूद पर्यटन और स्थानीय संसाधनों की संभावनाओं को पहचानें और स्वरोजगार योजनाओं के जरिए अपना काम शुरू करने की दिशा में प्रयास करें।

नथुआखान का यह एडवेंचर कैंप पर्यटन और स्वरोजगार को जोड़ने का उदाहरण बन रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को व्यवसाय से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर युवा अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

ADVERTISEMENTS
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें