Uttrakhand:1952 से अटका जमीन का मामला! हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश, अब DM लेंगे फैसला

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

नैनीताल: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरिद्वार के पथरी वन क्षेत्र में जमीन देने की मांग से जुड़ी याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ताओं को हरिद्वार जिलाधिकारी के सामने नया प्रत्यावेदन देने की छूट दी है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता आदेश की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी के समक्ष अपनी मांग रख सकते हैं। जिलाधिकारी को कानून के अनुसार अधिकतम नौ महीने के भीतर इस पर फैसला लेना होगा।

ADVERTISEMENTS

दरअसल, राम बहादुर समेत अन्य लोगों का कहना था कि वर्ष 1951-52 में आई बाढ़ के दौरान मुजफ्फरनगर के अलग-अलग गांवों में उनकी कृषि भूमि बह गई थी। इसके बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 अप्रैल 1952 को बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरिद्वार जिले के पथरी वन क्षेत्र में जमीन देने से जुड़ी अधिसूचना जारी की थी।याचिकाकर्ताओं का दावा है…कि इसके बाद पथरी वन क्षेत्र की कुछ जमीन को आरक्षित वन की श्रेणी से बाहर किया गया…लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के शिक्षकों को मिलेगी AI की ट्रेनिंग, SCERT और कोटक एजुकेशन फाउंडेशन के बीच हुआ MoU

उनका आरोप था कि समान परिस्थितियों वाले कुछ अन्य लोगों को जमीन आवंटित कर दी गई।अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता अपनी मांग को लेकर हरिद्वार जिलाधिकारी के समक्ष नया प्रत्यावेदन दे सकेंगे।पुरानी याचिका की जानकारी छिपाना पड़ा भारी, अग्रिम जमानत खारिजनैनीताल हाईकोर्ट में एक अन्य मामले में आवेदक को पिछली याचिका और कोर्ट के आदेश की जानकारी छिपाना भारी पड़ गया।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: MBPG कॉलेज में मतगणना के दौरान बवाल, ABVP प्रत्याशी धीरज बिष्ट ने फाड़े मतपत्र

न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करने के साथ ही आवेदक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।मामला हरिद्वार के भगवानपुर निवासी समीर से जुड़ा है। उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इससे पहले भी आवेदक ने आपराधिक रिट याचिका दाखिल की थी।

उस याचिका में गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज मुकदमे को खत्म करने की मांग की गई थी।राज्य सरकार के मुताबिक, पिछली याचिका में आवेदक ने कोर्ट के सामने यह भरोसा दिया था कि वह 20 मई 2026 तक या उससे पहले संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करेगा।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी :(बड़ी खबर) NSUI पीछे और ABVP तीसरे नम्बर पर, निर्दलीय आर्यन ने दर्ज की जबरदस्त जीत

आरोप है…कि उसने न तो अपना वादा पूरा किया और न ही अग्रिम जमानत की नई अर्जी में पिछली याचिका और उसमें दिए गए आदेश की जानकारी दी।कोर्ट ने इस आचरण को न्यायालय को गुमराह करने की जानबूझकर की गई कोशिश माना और अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी।

इसके साथ ही आवेदक को 50 हजार रुपये चार सप्ताह के भीतर उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करने का आदेश दिया गया है। तय समय में रकम जमा नहीं करने पर इसे भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह संबंधित जिलाधिकारी या कलेक्टर के जरिए वसूल किया जाएगा।

ADVERTISEMENTS
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें