हल्द्वानी : चंदन हॉस्पिटल ने किया तीन बेहद जटिल हृदय रोगों का सफलतापूर्वक इलाज

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  • हृदय रोगों की जटिलता में भी उम्मीद की धड़कन बना चंदन हॉस्पिटल — कार्डियोलॉजी विभाग ने रचा दुर्लभ उपलब्धियों का इतिहास

हल्द्वानी,: हल्द्वानी स्थित चंदन अस्पताल का हृदय विज्ञान संस्थान लगातार ऐसे उच्च मानक स्थापित कर रहा है, जिन्हें पहले केवल महानगरों के विशिष्ट (सुपर-स्पेशियलिटी) संस्थानों में ही संभव माना जाता था। हाल ही में, एक उल्लेखनीय चिकित्सा उपलब्धि के रूप में, हाल ही में अस्पताल ने तीन बेहद जटिल हृदय रोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया। इन मामलों में एक ही छत के नीचे उपलब्ध उन्नत तकनीक, समय पर उपलब्ध कराए गए इलाज और मल्टीडिसिपलिनरी विशेषज्ञता, सभी का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।

इन जटिल मामलों का इलाज चंदन अस्पताल की अत्याधुनिक हाइब्रिड कैथ लैब अज़ूरियन 7, (जो कि क्षेत्र में पहली है), मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, उन्नत इमेजिंग सुविधाएं और चौबीसों घंटे काम करने वाले कार्डियक आईसीयू के सहयोग से किया गया। इन सभी सर्जरी की खास बात यह रही कि इन सभी मरीजों का उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया।

पहला मामला था एक 70 वर्षीय पुरुष मरीज का, जिन्हें मल्टीवेसल कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ थी और कार्डियक बायपास (सीएबीजी) की योजना बन रही थी। इसी दौरान जाँच में एक विशाल 9.5 सेंटीमीटर का इंफ्रारेनल एब्डॉमिनल ऑर्टिक एन्यूरिज़्म (एएए) पाया गया, जो कॉमन इलिएक आर्टरीज तक फैला हुआ था। ओपन सर्जरी की स्थिति में हृदय की जटिल स्थिति और एन्यूरिज़्म के अचानक फटने की आशंका को देखते हुए टीम ने प्राथमिकता ईवीएआर को दी ताकि जटिलताओं से बचा जा सके और मरीज की जान सुरक्षित की जा सके। ऐसे में चंदन हॉस्पिटल की कार्डियोवेसकुलर टीम ने मिनिमली इनवेसिव एंडोवेसकुलर एन्यूरिज़्म रिपेयर (ईवीएआर) तकनीक अपनाई। इसमें स्टेंट-ग्राफ्ट का सटीक प्लेसमेंट किया गया, जिससे एन्यूरिज़्म को रक्त प्रवाह से पूरी तरह अलग कर निष्क्रिय किया गया, जिससे उसके फटने का जोखिम खत्म हो गया और मरीज ऑपरेशन के दिन ही चलने में सक्षम हो गया। केवल 48 घंटे में वे स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए। इस सफल उपचार में प्रमुख योगदान डॉ. विकास सिंह (चेयरपर्सन, कार्डियक सर्जरी) डॉ. रवि, कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख) और डॉ. वृषित सारस्वत (चेयरपर्सन, चंदन इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलॉजिकल एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी) का रहा।

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दूसरा मामला एक 38 वर्षीय महिला, श्रीमती जयंती देवी का था, जो वर्षों से रूमेटिक हार्ट डिज़ीज़, गंभीर माइट्रल स्टेनोसिस, ट्रायकस्पिड रिगर्जिटेशन और पुरानी एट्रियल फिब्रिलेशन से ग्रस्त थीं। उन्हें तीव्र कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर की स्थिति में चंदन हॉस्पिटल लाया गया। प्रारंभिक चिकित्सा के रूप में एनआईवी और डाययूरेटिक्स से स्थिति को स्थिर किया गया, जिसके बाद वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. विकास सिंह (चेयरपर्सन, कार्डियक सर्जरी) और उनकी टीम ने एक जटिल ओपन हार्ट सर्जरी की। इस सर्जरी में माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट (मैकेनिकल वाल्व), ट्रायकस्पिड वाल्व रिपेयर, हृदय में जमे रक्त के थक्कों की सफाई और लेफ्ट एट्रियल एपेंडेज को बाहर से बाँधकर बंद किया गया (लिगेशन), ताकि भविष्य में रक्त थक्के बनने की आशंका को रोका जा सके। मरीज चौथे दिन बिना किसी जटिलता के स्वस्थ होकर घर लौटीं। यह पूरी प्रक्रिया आयुष्मान भारत योजना के तहत पूर्णतः निःशुल्क की गई, जिससे मरीज के परिवार को न केवल चिकित्सकीय राहत, बल्कि आर्थिक संबल भी मिला।

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तीसरा और सबसे भावनात्मक मामला एक 2 वर्षीय बच्चे का था, जिसका वजन मात्र 7 किलो था और ट्रायकस्पिड एट्रेसिया जैसी दुर्लभ जन्मजात हृदय बीमारी से पीड़ित था। इस दुर्लभ स्थिति में बच्चे का शरीर हृदय में मौजूद दो छोटे छेदों — एएसडी और वीएसडी के ज़रिए ऑक्सीजन ले पा रहा था, जो उसकी ज़िंदगी को बस किसी तरह थामे हुए थे। दिल्ली एम्स में बीडी ग्लेन सर्जरी निर्धारित थी, लेकिन अचानक बच्चे की तबीयत इस कदर बिगड़ी कि उसका ऑक्सीजन स्तर 45% तक गिर गया (जबकि सामान्य स्तर 95% या उससे अधिक होता है) और दिल की धड़कन बंद हो गई। इमरजेंसी में पहुंचे बच्चे की स्थिति देखकर डॉ. मुनिब और उनकी टीम ने हार नहीं मानी और 30 मिनट तक लगातार सीपीआर करते रहे, जब तक कि उस नन्हें दिल की धड़कन दोबारा नहीं लौट आई। इसके बाद, डॉ. विकास सिंह (चेयरपर्सन, कार्डियक सर्जरी) , डॉ. रवि कुमार महावर (सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियक एनेस्थीसिया), डॉ. अमित सुयाल और डॉ. पीयूष की टीम ने तत्काल निर्णय लिया कि अब इंतजार संभव नहीं और चंदन हॉस्पिटल में ही बीडी ग्लेन सर्जरी की जाए। यह हाई-रिस्क ओपन हार्ट सर्जरी सफल रही। अगले कुछ दिनों तक बच्चा पीडियाट्रिक कार्डियक आईसीयू में वेंटिलेटर पर रहा, फिर धीरे-धीरे अपने से सांस लेने लगा। इसके बाद उसके फेफड़ों में जमा पानी को निकालने के लिए एक छोटी आईसीडी ट्यूब लगाई गई। कई दिनों की देखरेख के बाद, बच्चा स्थिर हालत में डिस्चार्ज हुआ। इस जीवनरक्षक ऑपरेशन की खास बात यह रही कि यह भी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।

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चंदन हॉस्पिटल में हुई यह तीनों सर्जरी सिर्फ हॉस्पिटल में अल्ट्रा मॉडर्न चिकित्सा के उपलब्ध होने की नहीं हैं, बल्कि ये समर्पण, निर्णय क्षमता और “हर जीवन मायने रखता है” की भावना की मिसाल हैं। डॉक्टरों, नर्सों, एनेस्थेटिस्ट्स, इमरजेंसी और आईसीयू स्टाफ, हर एक ने मिलकर दिखाया कि सही वक्त पर लिया गया निर्णय कैसे खतरे में पड़ चुकी ज़िंदगी को फिर से एक सामान्य जीवन जीने का अवसर दे सकता है। ये कहानियां सिर्फ इलाज की नहीं, भरोसे, उम्मीद और मानवीय करुणा की हैं, जो यह सिद्ध करती हैं कि अब हल्द्वानी जैसे शहरों में भी विश्वस्तरीय कार्डियक केयर पूरी गरिमा और संवेदना के साथ सुलभ है।

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