उत्तराखंड: मदनी के शेखुल ट्रस्ट मामले में प्रशासन ने जारी किए नोटिस

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उत्तराखंड: मदनी के शेखुल ट्रस्ट मामले में प्रशासन ने जारी किए नोटिस

देहरादून: महमूद मदनी के ट्रस्ट शेखुल एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की भूमि बेचने खरीदने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अपनी कारवाई शुरू कर दी है। इस प्रकरण में तथ्यों को छुपाकर लैंड यूज़ चेंज कराने वाले 5 लोगों की 143 की अनुमति भी निरस्त कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने ट्रस्ट के द्वारा दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर बेची गई भूमि के संदर्भ में 193 लोगों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। इस बारे में विकासनगर के एसडीएम कार्यालय से जांच पड़ताल आगे बढ़ रही है।

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जानकारी के मुताबिक प्रशासनिक जांच पड़ताल में तथ्य भी देखे जाएंगे कि महमूद मदनी के शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी के ज़रिए भूमि बेचने वाले रईस अहमद ने भूमि खरीदने वालों के साथ धोखा तो नहीं किया ?क्या उनसे हाईकोर्ट के निर्देशों को छुपाया तो नहीं गया।


उल्लेखनीय ये भी है कि मदनी ने अपने शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट को इस्लामिक शिक्षण संस्था ( मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के लिए बनाया था, आमतौर पर ऐसे ट्रस्ट नो प्रॉफिट नो लॉस पर चलते है ,प्रशासन ये भी देख रहा है कि दिल्ली में पंजीकृत उक्त ट्रस्ट की नियमावली का उलंघन तो नहीं हुआ क्योंकि कुछ विधि जानकार मानते है कि चेरिटेबल ट्रस्ट की भूमि बेची नहीं जा सकती। यदि बेची गई तो उसके लिए ट्रस्टियों की बोर्ड बैठक में लिखित सहमति जरूरी होती है और जब भूमि बेची जाती है तो वो हर सेल डीड में लगाई जानी जरूरी है।
जानकर बताते है कि चेरिटेबल ट्रस्ट नो प्रोफेट नो लॉस पर चलते है क्या इस भूमि प्रकरण के लेनदेन में ट्रस्ट को फायदा हुआ ? यदि हुआ तो ये आयकर अथवा अन्य एजेंसियों के साथ साथ जिला प्रशासन के लिए भी जांच पड़ताल का विषय है ।
मदनी के ट्रस्ट ने जिसे पावर ऑफ अटॉर्नी दी वो किन शर्तों पर दी? ये भी प्रशासनिक जांच का विषय है ।
बरहाल ये प्रकरण राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है। महमूद मदनी जोकि जमीयत उलेमा ए हिंद और दारुल उलूम देवबंद के कर्ताधर्ता है उनकी भूमिका हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा मामले में आरोपियों को संरक्षण देने की रही है। इस हिंसा में पुलिस ,निगम कर्मियों पर हमला करने थाने में आगजनी करने के आरोपी जेल भेजे गए थे और आरोपियों के लिए हाईकोर्ट में महंगे वकील खड़े करने में जमीयत उलेमा हिंद की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।

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