उत्तराखंड के पहाड़ों में छुपा है पलायन से लड़ने का बेहतरीन राज । यहां की उपजाऊ माटी ने युवाओं के हाथ से सोना उगाकर उन्हें एक नए कल का सपना दिया है । नैनीताल जिले में फल पट्टी(फ्रूट बैल्ट)के नाम से प्रख्यात रामगढ़, धनचुली, भीमताल, नाथुवाखान और मुक्तेश्वर अपने फलों के लिए एक अलग पहचान रखते हैं । सदियों से यहां सेब, खुमानी, पुलम, नाशपाती आदि की पारंपरिक खेती की जाती है । लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहां अनियंत्रित निर्माण होने के कारण फल उद्योग का स्तर गिर गया । क्षेत्रवासियों ने जमीनें बेचकर खेती बैंड कर दी और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया । अब ऐसे में इस उपजाऊ जमीन से मीठे रसीले सेब गायब हो गए । लेकिन उत्तराखंड के एक प्रगतिशील किसान सुधीर चड्डा ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि केवल सेब की खेती कम हाई डेंसिटी में पैदा कर अच्छी पैदावार ली और उत्तराखंड से पलायन को रोकने का एक नया रास्ता तैयार किया है
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उत्तराखंड का ज्यादातर युवा पहाड़ से अपनी खेती बाड़ी छोड़ बड़ी नौकरी की फिराक में राज्य से पलायन करने करने को मजबूर हुआ है लेकिन ज्यादा कमाई का सपना देख रहे युवाओं के लिए ऐसा रास्ता खुला है कि अब वह अपने घर पर ही सेव की खेती कर लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं क्योंकि उनके लिए मिसाल बने हैं प्रगतिशील किसान सुधीर चड्ढा जिन्होंने न सिर्फ हाई डेनसिटी एप्पल ऑर्चर्ड लगाया है । इंडो डच तकनीक से 8 वैरायटियों का सफल परीक्षण करते हुए, इंडो डच टू पौधे को उत्तराखंड के पलायन रोकने के लिए कारगर साबित कर दिया है। इस सेब के पौधे में महज प्लांटेशन के 13 महीने बाद ही सुधीर चड्डा ने वैज्ञानिकों अधिकारियों और पंतनगर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के सामने सेब के पौधों की हारवेस्टिंग कर हर किसी को चकित कर दिया है सुधीर चड्डा ने बताया कि आम तौर पर फलदार वृक्ष का पौधा लगाने के बाद वो 8 वर्ष में फल देता था लेकिन इस खेती से डेढ़ से दो वर्ष में ही दे देता है । उन्होंने इन पौंधों को फरवरी 2019 में लगाया था जो अब फल देने लगे है ।
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वही सेब की उन्नति खेती देख प्रभावित हुए मुख्य विकास अधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा के प्रगतिशील किसान सुधीर चढ़ा द्वारा अपनाए गए उन्नत खेती का पूरा प्रोसीजर वह शासन प्रशासन को अवगत कराएंगे और जिले में किसानों को स्वावलंबी बनाने के लिए इस तरह की खेती की तकनीक को बढ़ावा देने का हर भरसक प्रयास करेंगे।
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सुधीर चड्डा की फार्मिंग देख चकित रह गए वैज्ञानिकों का भी कहना है कि यह उत्तराखंड के युवाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है पहाड़ में छोटी जोत के किसान इस तरह कम हाइट होने के सेब के विभिन्न प्रजातियों के खेती कर सकते हैं जिसमें काफी मात्रा में उत्पादन हो रहा है और यह उत्तराखंड से युवाओं का पलायन रोकने का एक कारगर उपाय बन सकता है महज 13 महीने में एक सेब के पेड़ से 5 किलो फल निकलना बेहद उत्साहजनक परिणाम है।
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इंडो डच तकनीक से विकसित किए गए सेब के गाला, डेलिशियस(सुपर चीफ)समेत कुल 8 वैरायटी के पौंधे तैयार किए गए हैं जिसमे सौ प्रतिशत सर्टिफाइड ऑर्गेनिक एप्पल फार्मिंग है जबकि हिमांचल में ऑर्गेनिक फार्मिंग अब शुरू हुई है । इन सेबों की मंडी में बहुत मांग है और उनका पूरा माल पहले से ही बुक हो जाता है । इसका साइज, रंग और स्वाद भी मीठा है । प्रगतिशील किसान सुधीर चड्ढा का दावा है कि अगर पहाड़ के काश्तकार इन सेब के पौधे की खेती करते हैं तो बड़ी संख्या में पलायन रुक सकता है।
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7 thoughts on “उत्तराखंड- इस किसान का दावा कि यह तकनीक बदल देगी पलायन की तस्वीर, जानिए क्या कुछ है खास”
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अंतिम वाक्य का आशय करता है?
पलायन हो सकता है अथवा रुक सकता है?
क्या आशय है?
रुक सकता है
मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद
क्या ये इंडो डच तकनीक द्वारा सेब की फसल उगाने ओर मात्र डेढ़ साल में फल प्राप्त करने की खबर सच्ची है
KISAN KA DAWA HAI KI USNE 13 MAHEENE ME PAHALI FASAL TODI HAI