मदरसों में हिंदी-अंग्रेजी के साथ धार्मिक शिक्षा भी, धामी सरकार ने तय किए नया सिलेबस

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देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद अब वहां दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को भी निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार की ओर से गठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस्लाम समेत सिख, बौद्ध और जैन धर्मों की शिक्षा के लिए भी पाठ्यक्रम तैयार कराया है। सरकार का कहना है कि धार्मिक शिक्षा में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को महत्व दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मदरसों में क्या पढ़ाया जाएगा….इसके लिए पाठ्यक्रम तय किया गया है। इसे विद्वान इस्लामिक स्कॉलर्स की मदद से तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा में नफरत, हिंसा और कट्टरवाद के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम विद्वानों की मदद से तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें नफरत, हिंसा और कटुता से जुड़ी शिक्षा को जगह नहीं दी गई है।

प्राधिकरण ने इस्लाम के अलावा सिख, बौद्ध और जैन धर्मों की शिक्षा के लिए भी पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसका उद्देश्य धार्मिक शिक्षा को सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे से जोड़ना बताया गया है।

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राज्य में पंजीकृत मदरसों को सरकार की ओर से निर्धारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम के तहत हिंदी, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषय पढ़ाने होंगे। मदरसों को मान्यता प्राप्त करने के लिए संबंधित शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के नियमों व शर्तों को पूरा करना भी जरूरी है।

सरकार ने मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मान्यता और निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करने वाले संस्थानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार चाहती है कि देवभूमि में नई पीढ़ी प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़े। इसी उद्देश्य से मदरसों में पढ़ाए जाने वाले विषयों और धार्मिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों की शिक्षा के साथ धार्मिक अध्ययन का अवसर भी मिलेगा। इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था में तय मानकों और सामाजिक सद्भाव को महत्व दिया जाएगा।

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