उत्तराखंड: सुमित हृदयेश की डिजिटल सुरक्षा और पारिवारिक निजता को लेकर पुलिस से जांच की मांग

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हल्द्वानी। हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश की डिजिटल सुरक्षा और पारिवारिक निजता से जुड़ी आशंकाओं को लेकर पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। इस संबंध में दिए गए पत्र में विधायक की ओर से पहले की गई शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने और मामले की स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है।

पत्र में आशंका जताई गई है कि विधायक के मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, वाहन और परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन से जुड़ी गोपनीय जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई जा सकती है या उसका दुरुपयोग हो सकता है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य डिजिटल तकनीकों के जरिए भ्रामक या कथित तौर पर फर्जी ऑडियो-वीडियो सामग्री तैयार कर प्रसारित किए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

पत्र के अनुसार इस मामले में पहले भी पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई थी। हालांकि पत्र में कहा गया है कि विधायक को अब तक शिकायत पर हुई कार्रवाई, जांच की मौजूदा स्थिति और निष्कर्षों के बारे में जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में पूर्व शिकायत के रिकॉर्ड की समीक्षा कर जांच की प्रगति से अवगत कराने की मांग की गई है।

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मामले में संबंधित मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा का तकनीकी आकलन कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में कहा गया है कि यदि अनधिकृत पहुंच, डेटा चोरी, डिजिटल छेड़छाड़ या AI के माध्यम से फर्जी सामग्री तैयार करने अथवा प्रसारित करने के प्रमाण मिलते हैं….तो साइबर विशेषज्ञों से उनकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग भी की गई है।

पत्र में विधायक और उनके परिवार की व्यक्तिगत निजता एवं सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं का आकलन करने तथा जरूरत के अनुसार उचित सुरक्षा उपाय करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को जांच समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश देने और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

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पत्र में कहा गया है कि मामले की जांच बिना किसी पूर्वधारणा के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए। फिलहाल, पत्र में व्यक्त आशंकाओं और जांच की मांग के आधार पर मामले में कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है। डिजिटल डेटा तक अनधिकृत पहुंच या फर्जी सामग्री तैयार किए जाने की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।

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