श्रीनगर गढ़वाल। बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। पौड़ी गढ़वाल स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में अब हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि अस्पताल में यह उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में FUE यानी Follicular Unit Extraction तकनीक के जरिए हेयर ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। यह सुविधा शुरू होने से उन लोगों को फायदा मिल सकता है…जो निजी अस्पतालों में होने वाले महंगे हेयर ट्रांसप्लांट का खर्च नहीं उठा पाते।

कैसे होता है FUE हेयर ट्रांसप्लांट?
FUE आधुनिक हेयर ट्रांसप्लांट तकनीकों में शामिल है। इसमें सिर के उस हिस्से से बालों की जड़ों वाले छोटे-छोटे ग्राफ्ट निकाले जाते हैं….जहां बाल अपेक्षाकृत मजबूत होते हैं। इसके बाद इन ग्राफ्ट को गंजेपन वाले हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है।
त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के अनुसार, मरीज की जरूरत और गंजेपन की स्थिति के आधार पर करीब 1,000 से 5,000 तक ग्राफ्ट लगाए जा सकते हैं। प्रक्रिया में लगने वाला समय भी मरीज की स्थिति और उपचार की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
निजी अस्पतालों में महंगा होता है उपचार
हेयर ट्रांसप्लांट को आमतौर पर महंगी कॉस्मेटिक प्रक्रिया माना जाता है। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इसकी कीमत डॉक्टर, तकनीक और लगाए जाने वाले ग्राफ्ट की संख्या के अनुसार अलग-अलग होती है। कई मामलों में इसका खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
ऐसे में श्रीनगर बेस अस्पताल में यह सुविधा निःशुल्क शुरू होना क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉक्टर ने संकल्प को किया साकार
डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने एम्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद यह प्रयास करने का संकल्प लिया था कि त्वचा रोग विभाग में महंगे उपचारों को जरूरतमंद मरीजों तक निःशुल्क पहुंचाने की दिशा में काम किया जाए।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में सेवा का अवसर मिलने के बाद उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया और अब अस्पताल में हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है।
हर मरीज के लिए जरूरी नहीं हेयर ट्रांसप्लांट
चिकित्सकों के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट हर व्यक्ति के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं होता। इच्छुक मरीजों की पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच की जाएगी। बालों की स्थिति, गंजेपन का पैटर्न और डोनर एरिया का आकलन करने के बाद ही तय किया जाएगा कि मरीज के लिए यह उपचार उपयुक्त है या नहीं।
मेडिकल छात्रों को भी मिलेगी ट्रेनिंग
इस सुविधा से मरीजों के साथ मेडिकल कॉलेज के यूजी और पीजी छात्रों को भी लाभ मिलेगा। छात्रों को हेयर लॉस और गंजेपन की अलग-अलग स्थितियों के साथ हेयर फॉलिकल की पहचान, ग्राफ्ट निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।
त्वचा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी ने बताया कि विभाग में पहले से फोटोथेरेपी और लेजर तकनीक के जरिए विभिन्न त्वचा रोगों का उपचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक उपचार सुविधाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में श्रीनगर में ही उपलब्ध कराई जाएं….ताकि उन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।


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