उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चा शुरू

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उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चा शुरू

बीजेपी को हाई कमान की सहमति का इंतजार

“उत्तराखंड की डेमोग्राफी चेंज की समस्या पर बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग अपनी सरकार से की है, नीति निर्धारकों ने इस मांग का स्वागत किया, विपक्ष ने इसे छोटी मानसिकता बताया जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर और वैचारिक मंथन करने की जरूरत बताई।

देहरादून

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी में भराणीसैंण विधानसभा के बजट सत्र के दौरान रुद्रपुर के बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग सदन में रखने से राज्य में एक नई चर्चा को जन्म दिया है।
विदित हो कि विधायक शिव अरोरा भाजपा से है और उनके द्वारा ये मांग करने के पीछे ये संकेत माना जा रहा है कि राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार, यूसीसी की तरह या मदरसा बोर्ड खत्म करने की तर्ज पर एक नया प्रयोग उत्तराखंड की राजनीति में करने जा रही है। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर न सिर्फ उत्तराखंड राज्य की राजनीति में और सामाजिक तौर पर बहस भी शुरू हो गई है।

जानकर मानते है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून का विषय यूसीसी की तरह राज्य सरकार का ही है और इस पर सरकार के थिंक टैंक में मंथन भी चल रहा है। उत्तराखंड की विधान सभा में बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने ये विषय जब उठाया तो राजनीतिक सामाजिक गलियारों में ये चर्चा शुरू हुई है कि देवभूमि उत्तराखंड में जनसंख्या विषय भी केंद्रीय राजनीति में अब आने लगा है।
विधायक शिव अरोरा ने विधान सभा में अपनी बात रखने के दौरान सदन का ध्यान राज्य में बढ़ती हुई वर्ग विशेष ( मुस्लिम) आबादी की ओर दिलाया कि 2011 में उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी 14 प्रतिशत थी जोकि अब बढ़ कर 18 फीसदी तक पहुंच गई है। विधायक अरोरा ने यूपी से लगे तराई के जिलों के साथ साथ पहाड़ के कुछ ऐसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया जहां मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है ।
श्री अरोरा ने विशेष समुदाय के “हम पांच हमारे पच्चीस” के अभियान को देवभूमि उत्तराखंड के लिए खतरनाक बताया और कहा कि हमारे उत्तराखंड के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है लिहाजा यहां जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए और तीन से अधिक जिनके बच्चे हो उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए। उन्होंने कहा गैस, मकान, राशन जैसी सब्सिडी वाली सुविधाएं वर्ग विशेष को मिलने से उत्तराखंड राज्य सरकार का बजट बिगड़ रहा है।
विधायक शिव अरोरा कहते है कि 1971 में जब हिमाचल राज्य बना तब वहां मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत थी आज भी वहां इतनी ही आबादी है क्योंकि वहां सशक्त भू कानून पहले दिन से लागू हुआ ।लेकिन देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी में जबरदस्त बदलाव हुआ है। भविष्य की दृष्टिंस इसपर विचार करने की जरूरत है।

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बीजेपी विधायक श्री अरोरा के सदन में स्पष्टता से बोले जाने के बाद उन्हें बाद में अन्य बीजेपी विधायकों का भी समर्थन मिला है।

विधायक श्री अरोरा ने विधानसभा अध्यक्ष का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया कि यूपी से लगे हरिद्वार जिले में मुस्लिम आबादी 38 प्रतिशत,उधम सिंह नगर में 34 प्रतिशत,देहरादून जिले में 33 प्रतिशत और नैनीताल जिले में 32 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। डेमोग्राफी चेंज की ये समस्या उत्तराखंड में एक बड़ा सामाजिक,राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है , तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से कांग्रेस बढ़ती मुस्लिम आबादी को संरक्षण देती आई है। कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी भूमि पर नदी नालों किनारे मलिन बस्तियों मुस्लिम आबादी की बसावट हुई और यहां जनसांख्यिकी में बदलाव देखने में आ रहा है।
जनसांख्यिकी असंतुलन से धामी सरकार चिंतित है और इसी लिए सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरु किया गया है। सर्वे रिपोर्ट कहती है कि सरकारी भूमि पर ज्यादातर कब्जे मुस्लिम समुदाय के जोकि यूपी बिहार बंगाल आदि राज्यों से आकर बस गए है।
बीजेपी विधायक शिव अरोरा उधम सिंह नगर जिले से आते है उन्होंने अपने जिले की जमीनी हकीकत को सदन में रखा है जहां अवैध बसावट ने क्षेत्र की डेमोग्राफी को प्रभावित किया है। जसपुर,किच्छा, गदरपुर, खटीमा, रुद्रपुर,काशीपुर आदि विधानसभा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या का रूप ले चुके है।
शिव अरोरा के द्वारा सदन में रखे हुए वक्तव्य के बाद शुरू हुई इस सामाजिक, राजनीतिक बहस में ये बात भी सामने आई है कि यदि उत्तराखंड की धामी सरकार इस विषय पर कोई कदम आगे बढ़ाती है तो उसे अपने केंद्रीय नेतृत्व से सहमति लेनी होगी। पूर्व में धामी सरकार ने यूसीसी को लाने मदरसा बोर्ड की समाप्ति को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व से विचार विमर्श करके ही अपने संकल्प को पूरा किया था।

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क्या कहते है विधायक शिव अरोरा ..

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर विधायक शिव अरोरा कहते है कि हमने भारत के विभाजन का दर्द झेला है जिस तरह से यूपी से लगते उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है वो देवभूमि के लिए चिंता का विषय है हमारी अधिकांश सरकारी सुविधाएं विशेष वर्ग समुदाय के लोग उठा रहे है जिससे सरकार के बजट पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ रहे है इस कारण स्थानीय मूल निवासियों के हक भी मारे जा रहे है इसे आज नहीं रोका गया तो ये विषय देवभूमि उत्तराखंड के भविष्य के लिए घातक होगा।
ये लोग धार्मिक एजेंडे पर अपनी आबादी बढ़ा रहे है। इसलिए हमने मांग की है जिनके 3 से अधिक बच्चे हो उनको सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जाना चाहिए।

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क्या कहते है कांग्रेस विधायक काजी

विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण कानून की बीजेपी विधायक की मांग पर कांग्रेस विधायक काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने कहा कि बीजेपी हमेशा एक वर्ग विशेष को टारगेट करती है ,उन्होंने कहा बीजेपी विधायक कमजोर मानसिकता के है, देश में शायद ही कोई मुस्लिम होगा जिसके पच्चीस बच्चे होंगे।

क्या कहते है विशेषज्ञ:
उत्तराखंड में रणनीतिकार परिषद के सदस्य और जनसंख्या नियंत्रण के विषय में लंबे समय से शोध करने वाले मनु गौड़ कहते है कि उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है। उत्तराखंड विधानसभा में ये मांग उठी है इस पर आगे बहस और चर्चा तेज होनी चाहिए। इस पर जनमत बनाया जाना चाहिए। रहा सवाल राज्य का ,राज्यसरकार इस विषय को कानूनी जामा पहना सकती है।

क्या कहते है सीएम पुष्कर सिंह धामी :
उत्तराखंड विधानसभा में बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग अध्यक्ष के माध्यम से सरकार के समक्ष रखी है, ये उनका निजी विचार और मांग है, अभी इस पर और वैचारिक मंथन की जरूरत है, डेमोग्राफी चेंज उत्तराखंड की समस्या है हमारी सरकार इस पर सजग होकर इसपर काम भी कर रही है,हम उत्तराखंड से देव स्वरूप सांस्कृतिक वातावरण को बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है। हम अपने बच्चों को सांस्कृतिक रूप से एक मजबूत उत्तराखंड देने का संकल्प लिए हुए है और ये बात हमने सदन में भी कही है।

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