उत्तराखंड के युवा सिर्फ नौकरी मांग नहीं रहे, दूसरों को भी दे रहे रोजगार; सीएम धामी से साझा किए अपने अनुभव

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देहरादून। उत्तराखंड में युवा अपने हुनर और मेहनत के दम पर रोजगार पाने के साथ ही दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रहे हैं। कोई सोलर ऊर्जा से चलने वाली कार बना रहा है….तो कोई खेती, डेयरी और हर्बल उत्पादों के जरिए अपने कारोबार को आगे बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के ऐसे ही उद्यमियों, किसानों और नवाचार करने वाले लोगों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं।

विकसित उत्तराखण्ड यात्रा जारी है कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं, उद्यमियों, नवाचार करने वालों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्टार्टअप की संख्या करीब 700 से बढ़कर 1700 से अधिक हो गई है।

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कार्यक्रम में चंपावत के राहुल नारियल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी दी। उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने एक गाय से डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। आज उनके पास पांच बद्री गाय और आठ स्थानीय नस्ल की गायें हैं। सरकारी योजनाओं की मदद से उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाया।

पौड़ी के नवीन पटवाल गुच्छी मशरूम का व्यावसायिक उत्पादन कर रहे हैं और इससे रोजगार के अवसर भी तैयार हुए हैं। ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर स्टार्टअप शुरू किया….जिसका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर तक पहुंच चुका है।

चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी समेत अन्य हर्बल उत्पादों का काम शुरू किया। उनके प्रयासों से स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। नैनीताल की कमला देवी वाहन टायर मरम्मत के व्यवसाय से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वहीं सोमेश्वर के ललित खाती ने एकीकृत खेती को अपनाया है।

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चमोली के डॉ. हरपाल नेगी घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। इस काम से 300 से अधिक लोग जुड़े हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इससे सामूहिक रूप से सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की आय हो रही है।

कार्यक्रम में चीड़ की पत्तियों यानी पिरूल से उपयोगी उत्पाद तैयार करने वाली गीता पंत और सुमन पंथारी, बागवानी के क्षेत्र में काम कर रहे महाबल नेगी और मोटे अनाज से बेकरी उत्पाद बनाने वाली कल्पना बिष्ट के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्थानीय संसाधनों और उत्पादों का सही इस्तेमाल करके स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे गांवों में आजीविका के साधन विकसित होंगे और लोगों को अपने क्षेत्र में ही काम करने के अवसर मिलेंगे।

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कार्यक्रम में सिंगापुर से ऑनलाइन जुड़े शैलेश ने सीवेज के पानी के उपचार के क्षेत्र में अपने काम की जानकारी दी। उन्होंने चंपावत के एक गांव को गोद लेकर उसके विकास में सहयोग देने की इच्छा भी जताई।

वहीं अनीता शर्मा थपलियाल ने ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों की समावेशी शिक्षा से जुड़े अपने प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने देहरादून में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए अपना काम बढ़ाने की इच्छा जताई।

टिहरी की सपना राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें जर्मनी में नर्सिंग की नौकरी मिली।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों के अनुभव सुने और स्वरोजगार, उद्यमिता तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।

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