देहरादून। चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र का आधार हैं और इन पर सवाल या आरोप तथ्यों के आधार पर लगाए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री धामी ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद जारी आधिकारिक नोट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक नोट में भी बैठक के फैसलों को पूर्ण आयोग की स्वीकृति प्राप्त होने की बात कही है।
धामी ने कहा कि जब चुनाव में कांग्रेस को जनता का समर्थन नहीं मिलता है तो राहुल गांधी अपनी हार की जिम्मेदारी कभी ईवीएम तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर डालते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्था पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस हो सकती है…लेकिन आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार के लिए अलग-अलग कारण बताने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी को लेकर धामी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए सार्वजनिक बयानों में गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने इंदौर में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी की।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर लगाए गए आरोपों और कांग्रेस नेता की ओर से दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत को लेकर की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया। धामी ने कहा कि देश की सेवा करने वाले लोगों के बारे में इस तरह की टिप्पणियों पर सवाल उठते रहे हैं।
उत्तराखंड को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने नकल विरोधी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। धामी ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आरोप लगाने से पहले उपलब्ध आंकड़ों और सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को भी देखना चाहिए।
चुनाव आयोग के मौजूदा विवाद के संदर्भ में मुख्यमंत्री का कहना है कि किसी आंतरिक टिप्पणी को अंतिम संस्थागत निर्णय के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। आयोग की ओर से भी पहले कहा गया है कि वह बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है और आंतरिक टिप्पणियां उसकी नियमित संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
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